जीवन का असली सत्य एवं सुख
जीवन और मरण दुनिया का एक ऐसा सत्य है जिसे मिथ्या कहा नहीं जा सकता किन्तु इस सत्य को कोई अपनाने को तैयार नहीं होता|सभी जानते हैं कि यहाँ से लेकर कुछ नहीं जाना है फिर भी इस माया जाल में इतना उलझते हैं कि रिश्ते नाते,कर्म, फर्ज, माता-पिता, बंधू-बांधव सब भूल जाते हैं| केवल पैसा स्वयं के लिए किसी भी हद तक गिर कर कमाने को तत्पर रहते हैं| लेकिन इन्सान ये क्यों भूल जाता है कि वो मुट्ठी बंद करके जन्म लिया था अर्थात किस्मत अपने साथ लेकर आया था, लेकिन जब वो इस दुनिया से जाता है तो हाथ खुला होता है अर्थात वो यहाँ से कुछ नहीं लेकर जा रहा है यहाँ तक कि ये शरीर भी छोड़ कर जाता है|
मेरा ऐसा विश्वास है कि यदि मनुष्य में ये चेतना आ जाये कि केवल पैसा ही सब कुछ नहीं होता, रिश्ते की अहमियत समझाना, माता-पिता की सेवा करना, दूसरों के दुःख दर्द बाटना, भी उतना जरूरी है जितना कि पैसा कमाना तो मनुष्य सुखी हो जायेगा, उसे कोई कष्ट न होगा,क्योकि मनुष्य जिन्दगी का असली सत्य समझ लेगा|
गुरुवार, 10 दिसंबर 2009
बच्चे मन के सच्चे
कहते हैं की इश्वर बच्चों की पुकार ,बच्चों की अरदास सबसे पहले सुनता है ,आखिर क्यों? ये प्रश्न सबके दिल में होता है किन्तु उत्तर कोई नहीं जानता |इश्वर इसलिए बच्चों की आवाज को सुनता है क्योंकि बच्चे दिल के साफ होते है उनका दिल निर्मल पानी की तरह ,शीशे की तरह पारदर्शी होता है, उनके मन में खोट नहीं होती, इसलिए उनके दिल से निकली हर आवाज प्रभु तक आसानी से पहुँच जाती हैं |बच्चों में अहं की भावना भी नहीं होती |उनकी मांग भी एक सिमित दायरे की होती है, जबकी हम बड़े यही सोचते हैं कि हम से बड़ा दूसरा कोई न हो, जो कुछ मुझे प्राप्त हो दुसरे के पास न हो| सब मेरी ही तारीफ करे| ऐसे में जरा सोचो प्रभु कहाँ सुन पायेगा क्योकि हमारी आवाज तो हमारे अहंकार में ही खो गयी वो तो प्रभु तक पहुंच ही नहीं पाई ,इसलिए दिल को हम साफ रखेगें ,निःस्वार्थ ,निष्पाप मनसे जबहम प्रार्थना करेगें तो हमारा भी अरदास सुनेगा जैसा कि वो बच्चों की सुनता है |
कहते हैं की इश्वर बच्चों की पुकार ,बच्चों की अरदास सबसे पहले सुनता है ,आखिर क्यों? ये प्रश्न सबके दिल में होता है किन्तु उत्तर कोई नहीं जानता |इश्वर इसलिए बच्चों की आवाज को सुनता है क्योंकि बच्चे दिल के साफ होते है उनका दिल निर्मल पानी की तरह ,शीशे की तरह पारदर्शी होता है, उनके मन में खोट नहीं होती, इसलिए उनके दिल से निकली हर आवाज प्रभु तक आसानी से पहुँच जाती हैं |बच्चों में अहं की भावना भी नहीं होती |उनकी मांग भी एक सिमित दायरे की होती है, जबकी हम बड़े यही सोचते हैं कि हम से बड़ा दूसरा कोई न हो, जो कुछ मुझे प्राप्त हो दुसरे के पास न हो| सब मेरी ही तारीफ करे| ऐसे में जरा सोचो प्रभु कहाँ सुन पायेगा क्योकि हमारी आवाज तो हमारे अहंकार में ही खो गयी वो तो प्रभु तक पहुंच ही नहीं पाई ,इसलिए दिल को हम साफ रखेगें ,निःस्वार्थ ,निष्पाप मनसे जबहम प्रार्थना करेगें तो हमारा भी अरदास सुनेगा जैसा कि वो बच्चों की सुनता है |
बुधवार, 9 दिसंबर 2009
ईश्वर की इक्षा सर्वोपरी होती है
आपन सोचा होत नहीं, हरी चेता तत्काल ,
बलि चाह आकाश को, भेज दियो पाताल |
ये पंक्तियाँ एकदम सत्य दर्शाती है की केवल सोच लेने से ही ईश्वर के दर्शन नहीं प्राप्त हो जाता | कभी कभी व्यक्ति धार्मिक स्थान पर जन्म से ले कर अंतिम क्षण तक वहीं रहता है किन्तु उस स्थान का पुण्य नहीं प्राप्त कर पता क्योकि हरी का आदेश नहीं होता, इश्वर की इक्षा नहीं होती | काशी, प्रयाग, हरिद्वार जैसे स्थान पर जन्म लेकर भी वहां की पवन स्थान का परम सुख नहीं प्राप्त कर सकते, जबकि देश विदेश से लाखों पर्यटक पूर्णतः इसका सुख प्राप्त करते हैं कहने का तात्पर्य यह है हम केवल अपनी इक्षा से ईश्वर दर्शन का सुख नहीं उठा सकते जब तक प्रभु की इक्षा उसमें न हों | जब प्रभु की इक्षा होती है तो बिना किसी बाधा के दूर से पास तक सभी धाम का दर्शन बिना किसी बाधा के हो जाता है | ऐसा मेरा परम विश्वास है | कहने का अर्थ यही है की सर्वप्रथम इश्वर से प्रार्थना करो तथा सच्चे मन से विनती करो जिससे कार्य सफल हो |
बलि चाह आकाश को, भेज दियो पाताल |
ये पंक्तियाँ एकदम सत्य दर्शाती है की केवल सोच लेने से ही ईश्वर के दर्शन नहीं प्राप्त हो जाता | कभी कभी व्यक्ति धार्मिक स्थान पर जन्म से ले कर अंतिम क्षण तक वहीं रहता है किन्तु उस स्थान का पुण्य नहीं प्राप्त कर पता क्योकि हरी का आदेश नहीं होता, इश्वर की इक्षा नहीं होती | काशी, प्रयाग, हरिद्वार जैसे स्थान पर जन्म लेकर भी वहां की पवन स्थान का परम सुख नहीं प्राप्त कर सकते, जबकि देश विदेश से लाखों पर्यटक पूर्णतः इसका सुख प्राप्त करते हैं कहने का तात्पर्य यह है हम केवल अपनी इक्षा से ईश्वर दर्शन का सुख नहीं उठा सकते जब तक प्रभु की इक्षा उसमें न हों | जब प्रभु की इक्षा होती है तो बिना किसी बाधा के दूर से पास तक सभी धाम का दर्शन बिना किसी बाधा के हो जाता है | ऐसा मेरा परम विश्वास है | कहने का अर्थ यही है की सर्वप्रथम इश्वर से प्रार्थना करो तथा सच्चे मन से विनती करो जिससे कार्य सफल हो |
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