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शनिवार, 28 नवंबर 2009

दक्षिणावर्ती शंख का महत्त्व



एक बार भगवान विष्णु जी ने लक्ष्मीजी से पूछा कि आपका निवास कहाँ कहाँ होता है ? उत्तर में लक्ष्मीजी ने कहा - लाल कमल , नील कमल , शंख , चंद्रमा और शिवजी में मेरा निवास होता है | लक्ष्मीजी और शंख दोनों ही समुद्र से उत्पन्न हुए  हैं | इसलिए शंख को लक्ष्मीप्रिया , लक्ष्मी भ्राता , लक्ष्मी सहोदर आदि  नामों से जाना जाता है | अतः यह दोनों भाई बहिन हैं | शंख बहुत प्रकार के होतें हैं , लेकिन प्रचलन में मुख्य रूप से दो प्रकार के शंख है | प्रथम वामवर्ती शंख , दूसरा दक्षिणावर्ती शंख | वामवर्ती शंख का पेट बांयी ओर को खुला होता है |तंत्र शास्त्र में वामवर्ती शंख की अपेक्षा दक्षिणावर्ती शंख को विशेष महत्त्व दिया गया है | यह शंख वामवर्ती  शंख के विपरीत इनका पेट दायीं ओर खुला होता है | इस प्रकार दायीं ओर की भंवर वाला शंख " दक्षिणावर्ती " कहलाता है |
प्रायः सभी दक्षिणावर्ती शंख मुख बंद किये होते हैं | यह शंख बजाये नहीं जाते हैं , केवल पूजा रूप में ही काम में लिए जाते हैं | शास्त्रों  में दक्षिणावर्ती शंख के कई लाभ बताये गए है :-

  • राज सम्मान की प्राप्ति


  • लक्ष्मी वृद्धि


  • यश और कीर्ति वृद्धि


  • संतान प्राप्ति


  • बाँझपन से मुक्ति


  • आयु की वृद्धि


  • शत्रु भय से मुक्ति


  • सर्प भय से मुक्ति


  • दरिद्रता से मुक्ति

दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर उसे जिसके ऊपर छिड़क दिया जाये . वह व्यक्ति तथा वस्तु पवित्र हो जाता है |

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