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शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

एक आस्था फूटपाथ पर गुज़र बसर करने वालों की

 आज मेरी कार मुंबई की सड़कों पर दौड़ रही थी,तभी मेरी निगाह अचानक फुटपाथ पर पड़ी, जहाँ काफी झुग्गी झोपड़ियाँ थी,अभी मै देख  ही रही थी कि तभी मुझे उन झोपड़ियों के बीच एक शिवालय दिखा| मैने गाड़ी ड्राईवर से रोकने के लिए कहा,ड्राईवर ने गाड़ी रोकी मैने उस मंदिर में दर्शन किया मदिर बहुत छोटा सा था किन्तु साफ था आस्था का दीपक पूरी रौशनी बिखेरे था वहाँ कोई महिला पूजा कर रही थी उसने गुड का प्रसाद  दिया|मै ये सोचने को मजबूर थी कि इनके पास धन नहीं है किन्तु ये अपनी झोपडी के बीच भी एक छोटा सा मंदिर बनाया है|मुझसे रहा नहीं गया मै उन झोपडी में रहने वालों से पूछ बैठी कि आपने ये मंदिर बनाया है या फिर मंदिर पहले से था ? उसमें से एक मजदूर ने बताया कि हमने ये जगह इसलिए चुनी क्योकि ये मंदिर था और हम लोग ये विश्वास रखते हैं कि हम भरपेट भोजन कर रहें है और तन ढंका है वो इनकी ही देन है|यदि हम इनके पास रहेगे तो हमें कार्य भी मिलेगा और दो वक्त कि रोटी भी|आगे जिज्ञासा मेरी बढ़ी मैने पूछा कि आप को इतनी आस्था है तो आपने कभी ये क्यों नही सोचा कि आपको ईश्वर ने और पैसे क्यों नहीं दिए?उसने जवाब दिया कि मेमसाहब यदि मेरी किस्मत इतनी अच्छी होती तो मै कहीं बड़े घर में जन्म लेता|
मैने बात आगे बढाया कि आप ऐसा क्यों सोचते है जन्म लेना ही सब कुछ नहीं होता इश्वर किआस्था एवम मेहनत आपको बहुत कुछ दे सकता है इस पर उस मजदूर के उत्तर ने हमें सोचने को मजबूर कर दिया ,उसने कहा आस्था और कर्म दो अलग  चीज़ हो कर भी एक दुसरे से जुडी है कर्म हम करते है जितना हमारे किस्मत में लिखा होता है,और आस्था पूजा हम करते है, और करना चाहिए जितना हमारे पास वक्त हो साथ ही दूसरी बात पूजा कुछ मागने के लिए ना करके आत्मा कि शांति के लिए करना चाहिए|अब हमारे पास कोई प्रश्न नहीं था मैं उस अजनबी मजदूर   से कुछ क्षण में ही बहुत कुछ सीख कर कार  में बैठ गयी|कार आगे बढ़ चली ये प्रातः काल का वक्त था ठंडी हवा के साथ ठंडी साँस मैने लिया,बस मैं एक चीज़ को सोचने को मजबूर थी कि झोपडी में रह कर आदमी इतनी बड़ी बात सोच सकता है कि पूजा - अच्छी सोच के लिए करो ना कि और पैसा पाने के लिए|काश....ऐसा सोच सभी की होती.......   

2 टिप्‍पणियां:

  1. यही असली पूजा है. बिन मागे मोती मिले मांगे मिले ना दान.
    आपने बहुत सुन्दर चिंतन से रुबरु करवाया इसके लिये धन्यवाद.

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  2. शानदार लेख। ईशवर के प्रति आस्था हमें कर्म में विशवास आैर आंत्म सतोष सिखाती है।

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