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रविवार, 21 फ़रवरी 2010

हाय ये बोर्ड परीक्षा से बदलता मौसम..

उत्तर भारत में ठण्ड की मार अभी खत्म होनी शुरू  हुयी है,मौसम बदलने लगा कुछ लोगों के यहाँ मौसम ज्यादा गर्म हो चुका है क्योकि उनके यहाँ बोर्ड परीक्षा है.....माता पिता को ज्यादा पसीने छूट रहें हैं किसी को दसवीं की परीक्षा की चिंता है तो  कहीं ज्यादा पसीने बह रहे हैं क्योकि बारहवीं  की बोर्ड परीक्षा का सामना करना है|कपिल सिब्बल तो बहुत कोशिश कर रहें हैं, किन्तु ये आदत ऐसी हो गयी है की बिना टेंशन लिए नीद नहीं आती|आजकल नम्बर की मारामारी ऐसी हो गयी है कि बच्चे जितना नम्बर लाते है हमें उससे ज्यादा कि उम्मीद रहती है|ख़ैर बच्चे तो बच्चे ही है..........
अब बात आती है हमें मौसम के हिसाब से कितना बदलना चाहिए?आजकल टेलिविज़न पर समाचारपत्रों में प्रत्येक जगह ये बताया जाता है कि बच्चों पर प्रेशर मत डालो |हम जैसे माता पिता बहुत डर जाते है कि सच में बच्चों के ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डालना चाहिए|अब मेरा बेटा जो कि दसवीं में है वो तो समझदार है जिसे स्वयं ही चिंता रहती है किन्तु मैने ऐसे भी बच्चों को देखा है जो कि इन आर्टिकल को खूब भुना रहे है अब दुविधा ये होती है कि बच्चों को पढने के लिए कितनी सीमा तक कहना उचित होगा क्योकि बच्चों के आजकल बढ़ते कदम माँ पिता को धर्म संकट में डालते है| यदि ज्यादा कहते हैं तो सबसे सुननी पडती है कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव डाल रहे हो समाचारपत्र पढ़ा  करो...... 
लेकिन कभी कभी सोचना पड़ता है कि यदि हम इन्हें नहीं बतायेगे तो इनका जीवन कैसे बनेगा|मेरा मानना एक है कि बच्चों को शुरू से जिम्मेदारी देनी चाहिए जिससे आखिरी वक्त पर किसी भी प्रकार का दबाव ना देना पड़े केवल कोचिंग के भरोसे नहीं रहना चाहिए|समय ऐसा निर्धारित होना चाहिए कि उसमे पढाई, खेल, सोना(पर्याप्त निद्रा भी अति आवश्यक है ) सभी  कुछ बराबर आ जाये|बच्चों को नंबर के लिए दबाव मत दो किन्तु उनका समय भी ना बर्बाद हो ऐसा ध्यान रखना चाहिए|वारदातें वहाँ ज्यादा होती है जहाँ घर का माहौल थोडा सकुचित होता है|मानसिकता सकुचित नहीं होनी चाहिए |मेरा तो ये मानना है कि कोई भी कार्य करो किन्तु वो प्रोफेशनल होना चाहिए,अब जावेद हबीब काटने को तो बाल की कटाई करता है देशी भाषा में, किन्तु प्रोफेशनल होने की वजह से हेयर ड्रेसर बोलते है|कहने का तात्पर्य यही है की पढाई बहुत जरूरी है उसे कभी भी नकारना नहीं चाहिए बच्चों को हमेशा बताते रहना चाहिए|
आखिरी में यही कहना चाहुगी की मौसम को ही बदलने दो जबरदस्ती पढाई के लिए घर का मौसम ना बदलो खुद जियो  और औरों को भी जीने दो.....बच्चे अपने हैं उन्हें मार्ग दर्शन कराना हमारा कर्तव्य है इसमें कुछ बुरा नहीं है ये बात बच्चों को भी समझना चहिये|समय रहते ही चेतना चाहिए......

2 टिप्‍पणियां:

  1. बच्चों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिये..उनकी जान खाने के लिए स्कूल ही काफी हैं

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  2. बिल्कुल, समय रहते चेत जाना चाहिये.

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