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सोमवार, 25 जनवरी 2010

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी

  
कल 26 जनवरी को हम 60 वाँ गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनायेगे|कार्यालय,विद्यालयों,सरकारी विभागों में झंडे फहराए जायेगे प्रत्येक वर्ष की भांति कार्यक्रम दोहराए जायेगे|किन्तु क्या सही मायनो में हम गणतंत्र दिवस मना रहे है?हम रटी रटाई चीजों को सिर्फ दोहरा रहे है|हमने एक प्रथा बना ली है कि हमें स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस मनाना है|यदि आज के युग के छोटे बच्चों से पूछो कि 26 जनवरी हम क्यों मनातेहै?तो जवाब आएगा कि 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस....अरे sorry नहीं गणतंत्र दिवस मनाते है...आगे की कहानी उनको मालूम नहीं क्योकि उन्हें अपने कार्यक्रम देने है बाद में एक मिठाई खानी है|

६0 वर्षों में बहुत बदलाव आया ,कुछ बहुत अच्छे थे ,जैसे राकेश शर्मा प्रथम  भारतीय थे जो की चाँद पर गए, फिर कितने भारतियों ने एवरेस्ट पर तिरंगा  फहराया, इत्यादि | 60 वर्ष  पूर्व  लिखे गए सविधान से सबको बहुत सुख सुविधा मिली डा. आंबेडकर की परिश्रम सफल हुयी थी| किन्तु धीरे धीरे ऐसा लगता है की हम रस्सा कसी में  फंस रहे है|इतनी घटनाये घट रही है की लगता है  सविधान एवम कानून एक तरफ हो गया है एवम ज़ुल्म का बोलबाला होता जा रहा है|रक्षक ही भक्षक बनते जा रहे है|
हमारे नेता जिन पर सविधान की रक्षा की जिम्मेदारी है वो स्वयं में ही व्यस्त है|आये दिन कोई न कोई चटपटी खबर नेताओं को लेकर मिडिया में तो आती रहती है| ख़ैर......ये तो समाज की बात है|अब कभी कभी  लगता है कि ये इतिहास क्या है?आज का सत्य कल का इतिहास बनता है|आज से ६0 वर्ष पूर्व आज के दिन बाबा साहेब कितने प्रसन्न रहे होगे की उन्होंने कितने अच्छे तरीके से सविधान बनाया है उनका सपना सत्य हो रहा था जो उन्होंने कष्ट सह कर देखा था| हम लोगो ने भी इतिहास में यही पढ़ा था कि हम स्वतंत्र कैसे हुए,बाबा साहेब कि शिक्षा कैसे हुयी, मुग़ल काल क्या था? "मॉडर्न हिस्ट्री" में हम अंग्रेजो के बारे में पढ़ा.....साथ ही थोडा और आगे| किन्तु आज के युग में हो रहे ज़ुल्म ही कल का इतिहास है|क्या  हमारे बच्चे या फिर उनके बच्चे इतिहास में ये ज़ुल्म पढ़ेगें? या फिर राज्यों कि बंदर बाँट के बारे में?कि भारत में इतने राज्य है और उनकी राजधानी ये है |अगर राजधानी गलत हो गयी तो अंक कट जायेगे|और सबसे बड़ा इतिहास जो बनेगा वो है आपस कि तू तू  मै मै.....
सविधान जितने प्यार से लिखा गया है उतने ही प्यार से हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए|ये प्रत्येक भारतवासी का कर्तव्य है कि अपराध न तो करे न ही सहे, कानून कि रक्षा करे. सविधान को सम्मान दे|उन भारत के नगीनों को सम्मान दे, जिन्होंने आज़ादी के लिए प्राणों को न्योछावर कर दिया| आपस में ही हम क्यों लड़े राज्य अलग है किन्तु हम है तो भारतवासी| हम सभी लहराते है वही तिरंगा प्यारा| हम सब एक है|
तो आईये गणतंत्र दिवस कि पूर्व संध्या पर यहीसंकल्प ले कि हम सभी सविधान कि रक्षा करेगे, न तो कानून तोड़ेगें न ही कानून तोड़ने वालो को बक्शेगे|

 आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये|जय हिंद !!!

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