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मंगलवार, 19 जनवरी 2010

प्रवचन का महत्त्व


आज के युग में प्रवचन का प्रचलन अत्यधिक है

किन्तु सही अर्थ में क्या जनता प्रवचन सुनती है? क्या प्रवचन में कहे गये वचनों को जीवन में पालन करते हैं? क्या प्रवचन का अर्थ व्यक्ति जानता है? शायद नहीं
क्योकि समाज में अभी भी लोग प्रवचन सुनने का अर्थ अच्छा समय व्यतीत करना समझते हैं
बहुत कम लोग इसका अर्थ समझते हैं कि महान पुरुषों द्वारा कही गयी प्रत्येक शब्द में वजन होता है, उसे हमें अपनी ज़िन्दगी में उतारना चाहिए,उसे निर्वाह करना चाहिए
लेकिन जनता प्रवचन सुनने लोगों की बुराइयाँ करती हुई जाती है, वहाँ बैठ कर भी शारीरिक रूप से तो वहां होतें हैं, किन्तु मानसिक रूप से वहां पुर्णतः वहां नहीं होतें
इसलिए आधी प्रवचन सुनते हैं ,जिससे प्रवचन में कही गयी बात उनके समझ के परे होती हैं
अतः ये कहना उचित होगा कि प्रवचन में जाने के पूर्व हमें अपनी आत्मा को जगाना चाहिए, आत्म शक्ति जगानी होगी, क्योकि जब तक आत्मा से तरंग नहीं उठेगी , तब तक हमें प्रवचन में कहे गए शब्द हमारे मन मस्तिष्क तक नहीं पहुंचेगा
प्रवचन का सही अर्थ ही है कि हम अपने अंदर के अंधकार को हटा कर, दूसरों की भले में लग जाना चाहिए
इसे करने के लिए हमें शारीरिक , मानसिक रूप से उपस्थित होना चाहिए प्रवचन में
तभी हम प्रवचन का सही अर्थ समझ सकते हैं और दूसरों की मदद कर सकतें हैं
अन्यथा प्रवचन में जाने का कोई मतलब नहीं हैं
जब तक हम सारे वचनों को सही से ना सुने और फिर उनका पालन न करें तो प्रवचन में जानें का कोई मतलब नहीं है
अतः प्रवचन में जाने के लिए आत्मज्ञान अति आवश्यक है

2 टिप्‍पणियां:

  1. हमें शारीरिक , मानसिक रूप से उपस्थित होना चाहिए प्रवचन में
    तभी हम प्रवचन का सही अर्थ समझ सकते हैं और दूसरों की मदद कर सकतें हैं
    अन्यथा प्रवचन में जाने का कोई मतलब नहीं हैं
    जब तक हम सारे वचनों को सही से ना सुने और फिर उनका पालन न करें तो प्रवचन में जानें का कोई मतलब नहीं है ham to iseeliye naheee jaate.

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  2. आज मेनें आपकी रचित बहुत सी रचनाओं को पढ़ा, बहुत अच्छे विचार व खयालात हैं आपके,
    अनवरत यह अच्छा प्रयास करते रहिये ।

    ढ़ेर सारी शुभकामनाएं !

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