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भारत में बसंत ऋतु के आगमन की सूचना बसंत पंचमी से ही मिलनी शुरू हो जाती है|माघ शुक्ल पक्ष (महाराष्ट्र,गुजरात, दक्षिण भारत इत्यादि जगहों पर माघ कृष्ण पक्ष)की पंचमी को मनाया जाने वाला यह पर्व बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है|इस दिन माँ सरस्वती का जन्म दिवस मानते है इसलिए इस दिन माँ सरस्वती की पूजा परम्परागत तरीके से होती है| विद्या की देवी होने के कारण इनकी पूजा प्रत्येक विद्यालयों में होनी चाहिए किन्तु होती अब कुछ ही विद्यालयों में है|इस दिन को महाकवि निराला ने भी अपना जन्मदिवस माना था|
बसंत आने से ही प्रकृति के बदलाव देखने की एक सुखद अनुभूति होती है|सरसों के फूल से पीला आवरण ओढे धरती, उस पर मंडराते भौरे,नए बौर आमके पेड़ों को झुकाते हुए उस पर बैठी कोयल का कुहुकना ,सर्द हवाओं का बहना इत्यादि मन को रिझाती हैं|इन दिनों राजस्थान में धमाल और कामन की गूंज मन को खुश कर देती है|बसंत पंचमी एक अबूझ मुहूर्त है इसलिए शादी ,मुंडन जैसे कार्यक्रम बहुत स्थानों पर देखे जाते है|सरस्वती माँ की प्राचीन सिद्ध पीठ बासर में इस दिन बच्चों की प्रथम पट्टी पूजा अर्थात प्रथम अक्षर लिखने की शुरुआत होती है|इस दिन प्रायः लोग बसंती पीला वस्त्र .एवम भोजन करना पसंद करते हैं|
अपना देश त्योहारों का देश है, ऋतुओं का देश है,सबके पीछे आस्था छिपी होती है एक धर्म से जुडी होती है हमारी परम्परा,जो एक दूसरे को करीब लाने में सहायक होती है|जैसे बसंत पंचमी के अवसर सरस्वती पूजा में सबका मिलना,या फिर तीर्थ स्थानों पर लोगो का आना, पावन गंगा में स्नान करना आपस में एक दूसरे का मेल मिलाप दर्शाता है|
इस बार बसंत पंचमी 20 जनवरी को है,मेरा बसंत पंचमी पर सबको ढेरो शुभकामनाये|
माँ सरस्वती का सादर वंदन और आपको बसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर हार्दिक शुभकामनाएं.
जवाब देंहटाएंवसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ...सुंदर लेख
जवाब देंहटाएं"सरस्वती माता का सबको वरदान मिले,
जवाब देंहटाएंवासंती फूलों-सा सबका मन आज खिले!
खिलकर सब मुस्काएँ, सब सबके मन भाएँ!"
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क्यों हम सब पूजा करते हैं, सरस्वती माता की?
लगी झूमने खेतों में, कोहरे में भोर हुई!
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संपादक : सरस पायस