१) घर में नौ इंच से छोटी देव प्रतिमा होनी चाहिए| इससे बड़ी प्रतिमा घर से बाहर मंदिर में रखना चाहिए|
२) आरती के समय भगवन विष्णु के समक्ष बारह बार, सूर्य के समक्ष सात बार, दुर्गा जी के समक्ष नौ बार, शंकर भगवन के समक्ष ग्यारह बार, और गणेश जी के समक्ष चार बार,आरती घुमानी चाहिए|
३) पूजा करते समय केवल भूमि पर न बैठें| आसन जरुर बिछाएं|
४)रुद्राक्ष की माला से श्री गायत्री, श्री दुर्गा जी, श्री गणेशजी, श्री कार्तिकेय जी, एवम पार्वती जी की मन्त्रों का जप करना चाहिए|
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६)सफ़ेद चंदन की माला से सभी देवी देवताओं का जप कर सकते हैं|
७)लाल चंदन से श्री दुर्गा जी, हनुमान जी का जप कर सकते हैं|
८)स्फटिक माला से सरस्वती जी, गणपति जी का जप कर सकते हैं|
९) कमलगट्टे की माला से श्री कक्ष्मी जी का जप कर सकते हैं|
१०)जिस पर जप करे, उस स्थान की मृत्तिका (मिटटी ) जप के पश्चात मस्तक पर लगायें अन्यथा उस जप के फल को इन्द्र ले लेते हैं|
११)जप से उठने के तुरंत बाद आसन को लपेट कर रख दें अन्यथा आपके पुण्य को देवता ले जाते हैं|
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